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सोयाबीन की कौन सी वैरायटी है बेस्ट: गोल पत्तों वाली या नुकीले पत्तों वाली? जानें पूरी सच्चाई

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  खेती-किसानी के आज के इस ब्लॉग में सभी किसान भाइयों का स्वागत है। सोयाबीन की बोनी का समय आते ही हमारे मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सोयाबीन की कौन सी प्रजाति लगाएं? गोल पत्तों वाली या नुकीले पत्तों वाली? दोनों ही वैरायटियों के अपने-अपने अनोखे और शानदार फायदे हैं। अगर आप सही चुनाव नहीं कर पा रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए दोनों की तुलना करते हैं ताकि आप अपनी जमीन और जरूरत के हिसाब से सही फैसला ले सकें। नुकीले पत्तों वाली सोयाबीन: सुरक्षा और हवा का बेहतरीन तालमेल नुकीले पत्तों वाली सोयाबीन की प्रजाति उन किसानों के लिए वरदान है जो कीटों और बीमारियों से परेशान रहते हैं। इसके मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं:  प्राकृतिक कीट नियंत्रण: नुकीले पत्तों की बनावट ऐसी होती है कि हानिकारक कीटों (जैसे इल्ली) को इन पर अंडे देने में बहुत मुश्किल होती है। इससे आपकी फसल प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रहती है। निचली फलियों का पूरा विकास: इन पत्तों के बीच खाली जगह होने के कारण सूरज की रोशनी और ताजी हवा पौधे के सबसे निचले हिस्से तक आसानी से पहुंचती है। नतीजा यह होता है कि नीचे की फलियां भी उतनी...

कपास की रिकॉर्ड तोड पैदावार लेने का एकदम नया तरीका

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आज हम आपको कपास कीं फसल के बारे में बहोत ही जरूरी जानकारी देने वाले है। जिससे कपास की पैदावार जबरदस्त होंगी ये जानकारी मिट्टी की जांच करने के बाद बनाई गईं है। और अच्छी बागवानी वाली जमीन के लिए है। एक एकड़ खेत में कपास की बुवाई करने से पहले  24 किलो नायट्रोजन  20 किलो फाॅस्फरस 10 किलो पोटॅश जमीन मे अच्छेसे मीला देना है, या बुवाई कर देना है। कपास की बुवाई के 25 दिन बाद 12 किलो नायट्रोजन 10 किलो फाॅस्फरस 10 किलो पोटॅश . देना है। फीर कपास की बुवाई के 50 दिन बाद 12 किलो नायट्रोजन  फाॅस्फोरस नहीं दालना है 10 किलो पोटॅश. देना है। फीर कपास की बुवाई के 75 दिन बाद 12 किलो नायट्रोजन फाॅस्फोरस नहीं दालना है 10 किलो पोटॅश .देना है। एक बार अपने खेत के मिट्टी की जांच जरुर करें  और नजदीकी कृषि वैज्ञानि या कृषि सलाहकार की राय अवश्य लें . विडीओ देखने के लिए 👇दिए गए लिंक को क्लिक करें कपास की रिकॉर्ड तोड पैदावार लेने का एकदम नया तरीका

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