सोयाबीन की कौन सी वैरायटी है बेस्ट: गोल पत्तों वाली या नुकीले पत्तों वाली? जानें पूरी सच्चाई
खेती-किसानी के आज के इस ब्लॉग में सभी किसान भाइयों का स्वागत है। सोयाबीन की बोनी का समय आते ही हमारे मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सोयाबीन की कौन सी प्रजाति लगाएं? गोल पत्तों वाली या नुकीले पत्तों वाली?
दोनों ही वैरायटियों के अपने-अपने अनोखे और शानदार फायदे हैं। अगर आप सही चुनाव नहीं कर पा रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए दोनों की तुलना करते हैं ताकि आप अपनी जमीन और जरूरत के हिसाब से सही फैसला ले सकें।
नुकीले पत्तों वाली सोयाबीन: सुरक्षा और हवा का बेहतरीन तालमेल
नुकीले पत्तों वाली सोयाबीन की प्रजाति उन किसानों के लिए वरदान है जो कीटों और बीमारियों से परेशान रहते हैं। इसके मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं:
प्राकृतिक कीट नियंत्रण: नुकीले पत्तों की बनावट ऐसी होती है कि हानिकारक कीटों (जैसे इल्ली) को इन पर अंडे देने में बहुत मुश्किल होती है। इससे आपकी फसल प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रहती है।
निचली फलियों का पूरा विकास: इन पत्तों के बीच खाली जगह होने के कारण सूरज की रोशनी और ताजी हवा पौधे के सबसे निचले हिस्से तक आसानी से पहुंचती है। नतीजा यह होता है कि नीचे की फलियां भी उतनी ही मजबूत, लंबी और वजनदार बनती हैं जितनी ऊपर की।
दवाइयों का 100% असर: जब भी हम फसल पर कोई टॉनिक या कीटनाशक स्प्रे करते हैं, तो पत्तों के नुकीले आकार की वजह से वह दवा तने और अंदरूनी हिस्सों तक आसानी से पहुंच जाती है, जिससे दवा बर्बाद नहीं होती।
गोल पत्तों वाली सोयाबीन: पैदावार का असली 'पावर हाउस'
अगर आपका फोकस रिकॉर्डतोड़ उत्पादन और मोटे दानों पर है, तो गोल पत्तों वाली प्रजाति आपके लिए बेहतरीन साबित हो सकती है।
ज्यादा भोजन, शानदार पैदावार: गोल पत्तों का घेरा (सर्फेस एरिया) बड़ा होता है। इस वजह से ये पत्ते सूरज की ज्यादा रोशनी सोखते हैं। ज्यादा रोशनी का मतलब है ज्यादा प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) यानी ज्यादा भोजन। और ज्यादा भोजन का सीधा मतलब है- मोटे दाने और बम्पर पैदावार!
मिट्टी की नमी बचाए रखना: ये पत्ते बड़े होने के कारण जमीन को पूरी तरह से ढक लेते हैं। इससे तेज धूप सीधे जमीन पर नहीं पड़ती और मिट्टी की नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है। अगर बारिश में थोड़ा लंबा गैप (सूखा) भी आ जाए, तो भी यह फसल हरी-भरी खड़ी रहती है।
खरपतवार (Weeds) से मुक्ति: क्योंकि ये पत्ते जमीन पर अपनी घनी छाया बना लेते हैं, इसलिए घास और अनचाहे खरपतवार को पनपने के लिए जरूरी धूप नहीं मिल पाती। इससे आपके खेत में खरपतवार बहुत कम होती है और निंदाई-गुड़ाई का खर्च बचता है।


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