सोयाबीन की कौन सी वैरायटी है बेस्ट: गोल पत्तों वाली या नुकीले पत्तों वाली? जानें पूरी सच्चाई

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  खेती-किसानी के आज के इस ब्लॉग में सभी किसान भाइयों का स्वागत है। सोयाबीन की बोनी का समय आते ही हमारे मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सोयाबीन की कौन सी प्रजाति लगाएं? गोल पत्तों वाली या नुकीले पत्तों वाली? दोनों ही वैरायटियों के अपने-अपने अनोखे और शानदार फायदे हैं। अगर आप सही चुनाव नहीं कर पा रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए दोनों की तुलना करते हैं ताकि आप अपनी जमीन और जरूरत के हिसाब से सही फैसला ले सकें। नुकीले पत्तों वाली सोयाबीन: सुरक्षा और हवा का बेहतरीन तालमेल नुकीले पत्तों वाली सोयाबीन की प्रजाति उन किसानों के लिए वरदान है जो कीटों और बीमारियों से परेशान रहते हैं। इसके मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं:  प्राकृतिक कीट नियंत्रण: नुकीले पत्तों की बनावट ऐसी होती है कि हानिकारक कीटों (जैसे इल्ली) को इन पर अंडे देने में बहुत मुश्किल होती है। इससे आपकी फसल प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रहती है। निचली फलियों का पूरा विकास: इन पत्तों के बीच खाली जगह होने के कारण सूरज की रोशनी और ताजी हवा पौधे के सबसे निचले हिस्से तक आसानी से पहुंचती है। नतीजा यह होता है कि नीचे की फलियां भी उतनी...

रंगबिरंगी मक्का की खेती कैसे करें, जिसकी मार्केट में बहोत डिमांड बढ़ती जा रही है, पूरी जानकारी

आज आपको रंगबेरंगी मक्का के बारे में बताने वाले है, जिसकी खेती करके आप बहोत सारे पैसे कमा सकते हो, वो कैसे चलिए आपको बताते है।

ये मक्का की खासियत ये है की , इसका हर एक दाना अलग रंग का होता है, जिसके कारण ये मक्का बहोत आकर्षित दिखती है, और खाने में भी बहोत स्वादिष्ट लगती है।
ग्राहक इसे देखते ही खरीद लेते है। 

चलिए जानते है की इसका उत्पादन हम कैसे ले सकते है।
ये मक्का का उत्पादन हम आम मक्का के तरह ही ले सकते है, इसकी मार्केट में बहोत सारी प्रजातियां उपलब्ध है, आप कोईभी अच्छी प्रजाति लेकर अपने खेत में इसकी बुवाई कर सकते है।


बुआई और दूरी: बुआई को सही समय पर करें और बीच दो माखी की दूरी रखें ताकि पौधे अच्छे से विकसित हो सकें।रब्बी और खरीफ दो ही सीजन में हम इसकी बुवाई कर सकते है, प्रजाति के टेस्ट वेट अनुसार लगभग 7 से 8 किग्रा प्रति एकड़ बुवाई के लिए बीज लेना चाहिए।
आपको खरपतवार(घास) नही होने देना है, इस खास खयाल रखना है।

 सिंचाई: समय समय पर सिंचाई करें, खासकर फूलने के समय में। उचित जल समीक्षा करें और बर्डर इर्रिगेशन की तकनीक का भी प्रयोग कर सकते हैं।



खाद्यानुपात: खाद्यानुपात की सही मात्रा और प्रकार का चयन करें ताकि पौधों को सही पोषण मिल सके।

रोग और कीट प्रबंधन: उचित रोग और कीट प्रबंधन की जांच करें और आवश्यकता होने पर उपाय करें।

समयिक तैयारी: समयिक तैयारी, सही उपजाऊता, और मार्केटिंग योजना तय करें।

कलर फूल कॉर्न की खेती बाजार में आकर्षक मांग के कारण बढ़ रही है, जो आपके क्षेत्र में बेहतर मूल्य प्राप्ति की संभावनाएं प्रदान कर सकती हैं। इसलिए, स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना और स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार अपनी योजना को तैयार करना उत्तम रहेगा।






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